True knowledge
Tuesday, July 14, 2020
Thursday, June 25, 2020
सच्चे सतगुरु की पहचान
सच्चे सतगुरु की पहचान हमारे सद्ग्रन्थों में बताई गई है।
यजुर्वेद आ 19 मन्त्र 25 और 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बतायेगा व तीन समय की पूजा बतायेगा, वह जगत का उपकारक सन्त सच्चा सतगुरु होगा।
यजुर्वेद आ 19 मन्त्र 25 और 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बतायेगा व तीन समय की पूजा बतायेगा, वह जगत का उपकारक सन्त सच्चा सतगुरु होगा।
गीताजी आ 15 श्लोक 1 में कहा है कि जो सन्त संसार रूपी पीपल के वृक्ष के सभी विभाग बतायेगा, वह तत्वदर्शी सन्त होगा। कबीर साहेब ने आज से 600 वर्ष पहले बताया है कि
अक्षर पुरुष एक पेड़ है, निरंजन वाकी डार।
तीनों देवा शाखा हैं, ये पात रूप संसार।।
महापुरुषों ने भी अपनी वाणी में सच्चे गुरु की पहचान बतायी है। आदरणीय नानक साहेब जी ने कहा है कि
सोई गुरु पूरा कहावे, जो दो अख्खर का भेद बतावे।
एक छुड़ावै एक लखावै, तो प्राणी निज घर को जावे।।
कबीर साहेब ने कहा है कि
सतगुरु के लक्षण कहूँ, मधुरे वैन विनोद।
चार वेद षट शास्त्र, कहै अठ्ठारह बोध।।
यह सभी वाणियां आज सिर्फ सन्त रामपाल जी महाराज के ऊपर ही खरी उतरती है। आज के समय सन्त रामपाल जी महाराज ही दो अख्खरों का भेद बता रहे हैं।
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जिसमें आपको जानकारी मिलेगी
🔸सृष्टि की रचना कैसे हुई?
🔸हम जन्म से पहले कहां रहा करते थे?
🔸हम क्यों पैदा होते हैं, हम क्यों मरते हैं और मरने के बाद कहां जाते हैं?
🔸क्या कोई ऐसा सुखमय स्थान है जहां जाने के बाद कभी मृत्यु नहीं होती, न बुढापा आता, जहां किसी वस्तु का अभाव नहीं, जहां कोई काम नहीं करना पड़ता?
🔸इतनी भक्ति करने के बाद भी हम दुखी क्यों हैं, आपदाएं क्यों आती हैं?
🔸कौन हमें इन दुखों से आज़ादी दिला सकता है?
🔸कौन है इस आत्मा का असली रक्षक?
इन सभी प्रश्नों के उत्तर आपको इन Books में मिलेंगे।
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धन्यवाद
Saturday, April 25, 2020
Kabir is Supreme God
पवित्र वेदों में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर (कविर्देव) हैं।
1. अथर्ववेद कांड नम्बर 4 ,अनुवाक नम्बर 1 मन्त्र नम्बर 7
योथर्वाण पित्तर देवबन्धु ब्रह्स्पतिं नमसाव च गच्छात।
त्वम विश्वेषा जनिता यथास: कविर्देवो ण दभायत स्वधावान।।
1. अथर्ववेद कांड नम्बर 4 ,अनुवाक नम्बर 1 मन्त्र नम्बर 7
योथर्वाण पित्तर देवबन्धु ब्रह्स्पतिं नमसाव च गच्छात।
त्वम विश्वेषा जनिता यथास: कविर्देवो ण दभायत स्वधावान।।
ऋग्वेद मण्डल नम्बर 9 सूक्त 96 मन्त्र18
ऋषिमनाय ऋषिकृत स्वर्ष: सहस्त्रणीथ: पदवी: कवीनाम।
तृतीयं धाम महिष: सिषसन्तसोमो विराजमनु राजति ष्टुप।।
पवित्र कुरान शरीफ सु फु 25 आ 59 में कहा है कि अल्लाह कबीर है। सर्व पापों का नाश करने वाले तथा सभी के पूजा के योग्य हैं।
(इबादही कबीरा अर्थात पूजा के योग्य कबीर)
उसी ने सभी सृष्टि की रचना छः दिन में की है तथा सातवें दिन आसमान पर तख्त पर जा विराजा। काफिर लोग उस कबीर प्रभू (अल्लाहु अकबर) को सर्वशक्तिमान प्रभू नही मानते। तुम उनकी बातों में मत आना।
आदरणीय नानक जी ने कहा है कि पूर्ण परमात्मा "सत कबीर' है।
हक्का कबीर करीम तू बेऐब परवरदिगार।।
राग तिलंग महला 1 पंजाबी गुरु ग्रन्थ साहेब पृष्ठ नम्बर 721
कबीर साहेब ने भी अपनी वाणी में कहा है
न मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहां जुलाहे ने पाया।।
माता पिता मेरे कछु नाही, न मेरे घर दासी।
जुल्हे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हासी।।
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🔸इतनी भक्ति करने के बाद भी हम दुखी क्यों हैं, आपदाएं क्यों आती हैं?
🔸कौन हमें इन दुखों से आज़ादी दिला सकता है?
🔸कौन है इस आत्मा का असली रक्षक?
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Thursday, January 17, 2019
क्या कुंभ स्नान करने से हमारे पाप धुल जाते हैं?
कुम्भ स्नान हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।जिसमे करोड़ों श्रद्धालु स्नान करते हैं।तो क्या कुंभ में जाकर गंगा स्नान करना हमारे शास्त्रों में कहीं वर्णित है।
पवित्र गीताजी आ 16 मन्त्र 23 में कहा है कि जो शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करते हैं, उनको न तो सुख होता है, न ही उनकी कोई गति होती है और न ही उनको कोई लाभ होता है।
आप अपने घर से चलते हैं तो अनजाने में ही पैरों के तले दबकर करोड़ों जीव मरने का पाप इकठ्ठा कर लेते हैं।जिसकी सजा परमात्मा के दरबार में हमको भुगतना ही पड़ेगा।गक्योंकि परमात्मा की नजरों में चींटी से लेकर हाथी तक सब बराबर हैं।
यदि तीर्थ, व्रत करने से या कुम्भ स्नान से मुक्ति सम्भव होती,तो अकाल पड़ने वाले बहुत पहले ही मुक्त हो गए होते।
अतः यह जो हम भक्ति कर रहे हैं वह शास्त्रविरुद्ध साधना है।जिससे कोई लाभ नहीं है।कुम्भ स्नान करना कही शास्त्रों में वर्णित नही है।यह तो पैसे के लालच में अज्ञानियों ने सभी समाज को भृमित कर रखा है।
वास्तव में सत्य साधना पूर्ण सन्त रामपाल जी महाराज से लेकर शास्त्रानुकूल साधना करने से ही मोक्ष सम्भव है।
अतः आप सभी पुण्यात्माओ से निवेदन है कि इस अनमोल जीवन को व्यर्थ न गवाये और सन्त रामपाल जी महाराज का ज्ञान शांत मन से समझकर उनकी शरण में आये और अपना कल्याण करवाये।
Saturday, December 22, 2018
Wednesday, November 7, 2018
पवित्र गीताजी का ज्ञान श्रीकृष्ण जी ने नही बल्कि ब्रम्ह"काल"ने दिया
गीताजी आ 11मन्त्र 32 में गीता ज्ञान दाता कह रहे हैं कि हे अर्जुन,
लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ महाकाल हूँ।इस समय इन लोकों को नष्ट करने के लिए प्रबर्त्त हुआ हूँ।इसलिए यह सेना तेरे बिना युद्ध किये ही मारी जायेगी।
तो क्या श्रीकृष्ण जी काल थे??
गीताजी आ 8 मन्त्र 13 में कहा है कि
मेरा एक ॐ नाम है।इसी का जाप करने से मेरी वाली गति प्राप्त होगी।
पवित्र देवी पुराण सातवां स्कन्द में देवी दुर्गा जी कह रही है कि सब बातों को छोड़ दो और ब्रम्ह की साधना करो।और उसका "ॐ" नाम के जप के साथ ध्यान करो।
गीताजी आ 16 मन्त्र23 में कहा है कि
जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो कोई गति होती है और न ही कोई सुख को प्राप्त होते हैं।
इसलिए क्या करना है और क्या नही करना है उसके लिए शास्त्र ही प्रमाण है।
लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ महाकाल हूँ।इस समय इन लोकों को नष्ट करने के लिए प्रबर्त्त हुआ हूँ।इसलिए यह सेना तेरे बिना युद्ध किये ही मारी जायेगी।
तो क्या श्रीकृष्ण जी काल थे??
गीताजी आ 8 मन्त्र 13 में कहा है कि
मेरा एक ॐ नाम है।इसी का जाप करने से मेरी वाली गति प्राप्त होगी।
पवित्र देवी पुराण सातवां स्कन्द में देवी दुर्गा जी कह रही है कि सब बातों को छोड़ दो और ब्रम्ह की साधना करो।और उसका "ॐ" नाम के जप के साथ ध्यान करो।
गीताजी आ 17 मन्त्र 23 में कहा है कि उस सच्चिदानंद घन ब्रम्ह की साधना का "ॐ, तत, सत" यह तीन प्रकार का मन्त्र का जाप कहा है।
गीताजी आ 18 मन्त्र62 में कहा है कि हे अर्जुन, तू सब प्रकार से उस परमात्मा की ही शरण में जा, उसकी कृपा से ही तू परम् शान्ति और सनातन परम् धाम को प्राप्त होगा।
गीताजी आ 16 मन्त्र23 में कहा है कि
जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो कोई गति होती है और न ही कोई सुख को प्राप्त होते हैं।
इसलिए क्या करना है और क्या नही करना है उसके लिए शास्त्र ही प्रमाण है।
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Sunday, November 4, 2018
#नशे_से_आज़ादी
आज समाज में बड़े बुजुर्ग बच्चों के सामने हुक्का पीते है, तम्बाकू खाते व पीते भी है, तथा सभी प्रकार के नशे का सेवन आम बात हो गई है।इसी की देखा देखी फिर बच्चे भी धीरे धीरे इस बुराई से ग्रस्त हो जाते हैं।
इसके अलावा कोई लोग तो शौख में ही इसको शुरू करते हैं और फिर बाद में इसके आदी हो जाते हैं।फिर वह चाहकर भी इस बुराई को नही छोड़ पाते।
नशा उन्मूलन के प्रति सरकारें भी गम्भीर नही है क्योकि एक तरफ नशा उन्मूलन केंद्र खोले जाते हैं वही दूसरी तरफ ठेका और बार के लाइसेंस भी बेरोकटोक दिए जाते हैं।
इस भयंकर बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सन्त रामपाल जी महाराज ने बीड़ा उठाया है और वह इस कार्य में सफल भी हो रहे हैं।आज उनका कोई भी शिष्य नशे का सेवन करना तो दूर की बात है वह नशे को हाथ भी नहीं लगाते।
इसलिए आप सभी से नम्र निवेदन है कि आप भी इस महान कार्य में सन्त रामपाल जी महाराज का साथ दे ।जिससे एक स्वच्छ समाज की स्थापना हो सके।
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आज समाज में बड़े बुजुर्ग बच्चों के सामने हुक्का पीते है, तम्बाकू खाते व पीते भी है, तथा सभी प्रकार के नशे का सेवन आम बात हो गई है।इसी की देखा देखी फिर बच्चे भी धीरे धीरे इस बुराई से ग्रस्त हो जाते हैं।
इसके अलावा कोई लोग तो शौख में ही इसको शुरू करते हैं और फिर बाद में इसके आदी हो जाते हैं।फिर वह चाहकर भी इस बुराई को नही छोड़ पाते।
नशा उन्मूलन के प्रति सरकारें भी गम्भीर नही है क्योकि एक तरफ नशा उन्मूलन केंद्र खोले जाते हैं वही दूसरी तरफ ठेका और बार के लाइसेंस भी बेरोकटोक दिए जाते हैं।
इस भयंकर बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सन्त रामपाल जी महाराज ने बीड़ा उठाया है और वह इस कार्य में सफल भी हो रहे हैं।आज उनका कोई भी शिष्य नशे का सेवन करना तो दूर की बात है वह नशे को हाथ भी नहीं लगाते।
इसलिए आप सभी से नम्र निवेदन है कि आप भी इस महान कार्य में सन्त रामपाल जी महाराज का साथ दे ।जिससे एक स्वच्छ समाज की स्थापना हो सके।
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