गीताजी आ 11मन्त्र 32 में गीता ज्ञान दाता कह रहे हैं कि हे अर्जुन,
लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ महाकाल हूँ।इस समय इन लोकों को नष्ट करने के लिए प्रबर्त्त हुआ हूँ।इसलिए यह सेना तेरे बिना युद्ध किये ही मारी जायेगी।
तो क्या श्रीकृष्ण जी काल थे??
गीताजी आ 8 मन्त्र 13 में कहा है कि
मेरा एक ॐ नाम है।इसी का जाप करने से मेरी वाली गति प्राप्त होगी।
पवित्र देवी पुराण सातवां स्कन्द में देवी दुर्गा जी कह रही है कि सब बातों को छोड़ दो और ब्रम्ह की साधना करो।और उसका "ॐ" नाम के जप के साथ ध्यान करो।
गीताजी आ 16 मन्त्र23 में कहा है कि
जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो कोई गति होती है और न ही कोई सुख को प्राप्त होते हैं।
इसलिए क्या करना है और क्या नही करना है उसके लिए शास्त्र ही प्रमाण है।
लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ महाकाल हूँ।इस समय इन लोकों को नष्ट करने के लिए प्रबर्त्त हुआ हूँ।इसलिए यह सेना तेरे बिना युद्ध किये ही मारी जायेगी।
तो क्या श्रीकृष्ण जी काल थे??
गीताजी आ 8 मन्त्र 13 में कहा है कि
मेरा एक ॐ नाम है।इसी का जाप करने से मेरी वाली गति प्राप्त होगी।
पवित्र देवी पुराण सातवां स्कन्द में देवी दुर्गा जी कह रही है कि सब बातों को छोड़ दो और ब्रम्ह की साधना करो।और उसका "ॐ" नाम के जप के साथ ध्यान करो।
गीताजी आ 17 मन्त्र 23 में कहा है कि उस सच्चिदानंद घन ब्रम्ह की साधना का "ॐ, तत, सत" यह तीन प्रकार का मन्त्र का जाप कहा है।
गीताजी आ 18 मन्त्र62 में कहा है कि हे अर्जुन, तू सब प्रकार से उस परमात्मा की ही शरण में जा, उसकी कृपा से ही तू परम् शान्ति और सनातन परम् धाम को प्राप्त होगा।
गीताजी आ 16 मन्त्र23 में कहा है कि
जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करते हैं उनको न तो कोई गति होती है और न ही कोई सुख को प्राप्त होते हैं।
इसलिए क्या करना है और क्या नही करना है उसके लिए शास्त्र ही प्रमाण है।
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