Thursday, January 17, 2019

क्या कुंभ स्नान करने से हमारे पाप धुल जाते हैं?



कुम्भ स्नान हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।जिसमे करोड़ों श्रद्धालु स्नान करते हैं।तो क्या कुंभ में जाकर गंगा स्नान करना हमारे शास्त्रों में कहीं वर्णित है।

पवित्र गीताजी आ 16 मन्त्र 23 में कहा है कि जो शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करते हैं, उनको न तो सुख होता है, न ही उनकी कोई गति होती है और न ही उनको कोई लाभ होता है।

आप अपने घर से चलते हैं तो अनजाने में ही पैरों के तले दबकर करोड़ों जीव मरने का पाप इकठ्ठा कर लेते हैं।जिसकी सजा परमात्मा के दरबार में हमको भुगतना ही पड़ेगा।गक्योंकि परमात्मा की नजरों में चींटी से लेकर हाथी तक सब बराबर हैं।

यदि तीर्थ, व्रत करने से या कुम्भ स्नान से मुक्ति सम्भव होती,तो अकाल पड़ने वाले बहुत पहले ही मुक्त हो गए होते।

अतः यह जो हम भक्ति कर रहे हैं वह शास्त्रविरुद्ध साधना है।जिससे कोई लाभ नहीं है।कुम्भ स्नान करना कही शास्त्रों में वर्णित नही है।यह तो पैसे के लालच में अज्ञानियों ने सभी समाज को भृमित कर रखा है।

वास्तव में सत्य साधना पूर्ण सन्त रामपाल जी महाराज से लेकर शास्त्रानुकूल साधना करने से ही मोक्ष सम्भव है।

अतः आप सभी पुण्यात्माओ से निवेदन है कि इस अनमोल जीवन को व्यर्थ न गवाये और सन्त रामपाल जी महाराज का ज्ञान शांत मन से समझकर उनकी शरण में आये और अपना कल्याण करवाये।


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